Friday, August 22, 2008

दीवानगी

सीमा गुप्ता


ये मेरी दीवानगी ,
और उसकी संगदिली ,
रोज मिलने की सजा भी ,
और अदा भी बेदीली

1 comment:

"SURE" said...

न संगदिली है वाजिब न तंगदिली मंज़ूर,
ये दिल है कूचा यार का,अदब कायदे पे गौर हो
.......
छोटी सी नज़म में बहुत बड़ी बात लिख डाली है शायरा ने