Saturday, August 23, 2008

तलाश

सीमा गुप्ता

जिन्दगी की धुप ने झुलसा दिया
एक शीतल छावं की तलाश है
रंज उल्फ़त नफरत से निबाह किया
एक दर्द-मंद दिल की तलाश है
रास्तों मे मंजिलें भटक गईं ,
एक ठहरे गावं की तलाश है

1 comment:

"SURE" said...

बहुत अच्छी रचना है हर आदमी को तलाश है अपने वजूद की ....
रहा उम्र भर मै जिसकी तलाश में,
मरते दम पता चला,
वो रहते थे दिल के पास में