Tuesday, March 31, 2009

अश्कों का दिया

SEEMA GUPTA

रात गमगीन रही
दिल वीरान रहा
कितना खामोश ये आसमान रहा
सिसकियों की सरगोशियाँ उफ़
"अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा

2 comments:

seema gupta said...

" thanyou very much for publishing my poem here"

Regards

MANVINDER BHIMBER said...

"अश्कों का दिया "
अंधेरों मे मेहरबान रहा
bahut khoob