Wednesday, March 4, 2009

लाडली बिटिया

विमला भंडारी

तेरी सूरत....
जैसे मन में बसी कोई मोहनी मूरत
बेटी! तू है जहां में, मेरे लिये -
सबसे खूबसूरत !

तेरी आवाज...
बज उठते है
मानों सारे साज
मेरे लिये -
तू है सबसे खास !

तेरी आंखे...
जैसे मेरी चाहतो
की पांखे
गुजरती है जिनसे
मेरे ख्वाबों की राहें !

तेरे बाल...
जैसे उड़ी हो
बादलों से मस्त गुलाल,
जिनकी खुशबू से
सदा महके मेरे ख्याल !

तेरा चेहरा...
जैसे सूरज हो मेरा
जिससे हुआ
मेरा जीवन सुनहरा !

मेरी सांस-सांस में है तेरी धड़कन, मेरी आस-आस में तेरा ही रूपरंग
तेरा प्यार ही जीवन का सहारा, तुझे पाकर ही मिला मुझे किनारा

अपना प्यार ...
इसी तरह
सजाए रखना,

यूं ही सदा ...
मुझकों अपना
बनाए रखना।

तुम्हारा जन्मदिन...
आये बार-बार
खुशिया लाये हजार
सब मिलकर झूमे-नाचे गाये
तुम्हार जन्मदिन मनाये.


1 comment:

सुशील कुमार छौक्कर said...

बहुत ही बेहतरीन लिखा बेटी पर। बेटियाँ होती ही है इतनी प्यारी। हमने भी कुछ ज़ज़्बात लिखे थे अपनी बेटी पर।