Thursday, February 26, 2009

हश्र

नदीम अहमद नदीम




शेयर मार्केट के ओंधे मुंह गिरने की ख़बर से मैं बहुत खुश था। मुझसे अपनी खुशी छिपाये नहीं छिप रही थी।
पत्नी ने आख़िर पूछ लिया क्या बात है इतनी खुशी का सबब?
बात ही खुश होने की है। मनोज कई दिन से शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए मुझे प्रोत्साहित कर रह था लेकिन मैं टाल रहा था, मनोज ने चार लाख का इन्वेस्टमेन्ट कर रखा था।
लेकिन मनोज तो दुखी हो रहा होगा
फटाफट दौलतमन्द बनने की चाह का यही हश्र होना चाहिए।'' कहकर मैंने अख़बार उछाल दिया।

1 comment:

संगीता पुरी said...

दूसरों के कष्‍ट से खुशी .... ऐसा तो नहीं होना चाहिए।