Wednesday, February 11, 2009

ममता

नदीम अहमद नदीम
उस माँ का रोना बिलखना पत्थर दिल इंसानों से भी देखा नहीं जा रहा था। पूरा मुहल्ला ग़मगीन था। पुलिस की ग़फलत से एक मासूम निर्दोष बच्चा गोली का शिकार हो गया था।
मंत्रीजी की गाड़ियों का काफिला घर के आगे रुका। मंत्री महोदय ने रोनी सी सूरत बनाई और टी.वी. चैनल वालों को इशारा किया। उनका नाटक शुरू आपके होनहार बच्चे की असामयिक मृत्यु पर हमें बहुत दुःख है। ईश्वर की मर्जी के आगे.....!
यह एक लाख का चैक सरकार ने......
अचानक बिलखती हुई मां ने मंत्री का गिरेबां पकड़ लिया ला, मुझे तेरा बेटा दे दे। मैं तुझे दो लाख रुपया देती हूं, तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे बेटे की लाश की बोली लगाते हुए।
मंत्री अपना गिरेबां छुड़ाकर गाड़ी में सवार हो गया। एक मां का सामना करने की हिम्मत उसमें नहीं थी।

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