NAGMA JAVED
बेटियां!
खामोश रहती हैं
बेटियां!
माँओं का मुँह देखती हैं -
रोती हैं चुपके-चुपके
सोचती हैं
मांएँ, क्यों नहीं करती
उन्हें
बेटों जितना प्यार!
हिंन्दी विभाग, एन०एस०डी०टी०, महिला महाविद्यालय, मुम्बई।
बेटियां!
खामोश रहती हैं
बेटियां!
माँओं का मुँह देखती हैं -
रोती हैं चुपके-चुपके
सोचती हैं
मांएँ, क्यों नहीं करती
उन्हें
बेटों जितना प्यार!
हिंन्दी विभाग, एन०एस०डी०टी०, महिला महाविद्यालय, मुम्बई।
Comments
सच ही तो है. आज भी हमारे देश में ऐसी मानसिकता है