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Showing posts matching the search for SEEMA GUPTA

मौत की रफ़्तार

SEEMA GUPTA आज कुछ गिर के टूट के चटक गया शायद .. एहसास की खामोशी ऐसे क्यूँ कम्पकपाने लगी .. ऑंखें बोजिल , रूह तन्हा , बेजान सा जिस्म .. वीरानो की दरारों से कैसी आवाजें लगी... दीवारों दर के जरोखे मे कोई दबिश हुई ... यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...

अंतर्मन

SEEMA GUPTA अंतर्मन की , विवश व्यथित वेदनाएं धूमिल हुई तुम्हे भुलाने की सब चेष्टाएँ, मौन ने फिर खंगाला बीते लम्हों के अवशेषों को खोज लाया कुछ छलावे शब्दों के, अश्कों पे टिकी ख्वाबों की नींव, कुंठित हुए वादों का द्वंद , सुधबुध खोई अनुभूतियाँ , भ्रम के द्वार पर पहरा देती सिसकियाँ.. आश्वासन की छटपटाहट "और" सजा दिए मानसपट की सतह पर फ़िर विवश व्यथित वेदनाएं धूमिल हुई तुम्हे भुलाने की सब चेष्टाएँ,

मायाजाल

SEEMA GUPTA ह्रदय के मानचित्र पर पल पल तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे, यथार्थ को दरकिनार कर कुछ स्वप्नों ने सांसे भरी... छलावों की हवाएं बहती रही बहकावे अपनी चाल चलते रहे, कायदों को सुला , उल्लंघन ने जाग्रत हो अंगडाई ली.. द्रढ़निश्चयता का उपहास कर संकल्प मायाजाल में उलझते रहे, ह्रदय के मानचित्र पर पल पल तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...

ख्वाबों के आँगन

SEEMA GUPTA ख्वाबों के आँगन ने अपना कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया, वर्तमान ने हकीक़त , का दामन ठुकराया , अस्तित्व ने अपने, सामर्थ्य से मुख फैरा, शीशमहल का निर्माण किया... विवशता का परित्याग कर , दर्पण मचला जिज्ञासा का, भ्रम की आगोश मे, मनमोहक श्रिंगार किया ... बहते दरिया की भूमि पर , इक नीवं बना अरमानो की, हर तर्ष्णा को पा लेने का, निरर्थक एक प्रयास किया ... ख्वाबों के आँगन ने अपना कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया.........

तुम चुपके से आ जाना

SEEMA GUPTA सूरज जब मद्धम पड़ जाये और नभ पर लाली छा जाये शीतल पवन का एक झोंका तेरे बिखरे बालों को छु जाए चंदा की थाली निखरी हो तारे भी सो कर उठ जाए चोखट की सांकल खामोशी से निंदिया की आगोश में अलसाये बादल के टुकड़े उमड़ घुमड़ द्वारपाल बन चोक्न्ने हो जाये एकांत के झुरमुट में छुप कर मै द्वार ह्रदय का खोलूंगी तुम चुपके से आ जाना झाँक के मेरी आँखों मे एक पल में सदियाँ जी जाना

मै डरती हूँ

SEEMA GUPTA मै जानती हूँ ......... मेरे खत का उसे इंतजार नही मेरे दुख से उसे सरोकार नही , मेरे मासूम लफ्ज उसे नही बहलाते मेरी कोई बात भी उसे याद नही. मेरे ख्वाबों से उसकी नींद नही उचटती मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता उसे मुझसे जरा भी प्यार नही कोई आहट उसे नही चौंकाती क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही मगर मै डरती हूँ उस पल से जब वो चेतना में लौटेगा और पश्चाताप के तूफानी सैलाब से गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा मै डरती हूँ ....बस उस एक पल से

तेरे जाने के बाद

Seema Gupta आँखों मे जलजले , मरुस्थल दिल की जमीन . भावनाओ की साजिश , संभावनाओ का जलना . धधकते अंगारों से पल, दर्द का विकराल रूप , म्रत्यु से द्वंद , पथराये जिस्म का गलना . तेरे जाने के बाद......

"प्रेम"

SEEMA GUPTA भावों से भी व्यक्त ना हो, ना अक्षर में बांधा जाए खामोशी की व्याकरण बांची अर्थ नही कोई मिलपाये अश्रु से भी प्रकट ना हो ना अधरों से छलका जाए मौन आवरण मे सिमटा ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

याद तो फिर भी आओगे

SEEMA GUPTA ह्दय के जल थल पर अंकित बस चित्र धूमिल कर जाओगे याद तो फिर भी आओगे हंसना रोना कोई गीत पुराना सुर सरगम का साज बजाना शब्द ताल ले जाओगे याद तो फिर भी आओगे सुनी राहे, दिल थाम के चलना साथ बिताये पलो का छलना सब खाली कर जाओगे याद तो फिर भी आओगे कांधे पर सर और स्पर्श का घेरा रात के मुख पर चाँद का सेहरा तुम विराना कर जाओगे याद तो फिर भी आओगे

कभी किसी रोज

SEEMA GUPTA सुनना चाहता हूँ तुम्हे बैठ खुले आसमान के नीचे सारी रात चुनना चाहता हूँ रात भर तुम्हारे होठों से झरते मोतियों को अपनी पलकों से एक एक कर भरना चाहता हूँ अपनी हथेलियों में चाँदनी से धुले तुम्हारे चेहरे की स्निग्धता महसूस करना चाहता हू तुम्हारे बालों से ढके अपने चेहरे पर तुम्हारे साँसों की उष्णता सारी रात वह रात जो समय की सीमाओं से परे होगी और फिर किसी सूरज के निकलने का भय न होगा.

'दो फूल'

Seema gupta मेरी कब्र पे दो फूल रोज आकर चढाते हैं वो, हाय , इस कदर क्यों मुझे तडपाते हैं वो. मेरे हाथों को छुना भी मुनासिब न समझा, आज मेरी मजार से लिपट के आंसू बहाते हैं वो. हाले यार समझ ना सके अब तलक जिनका, मेरे दिल पे सर रख कर हाले दिल सुनाते हैं वो. जिक्र चलता है जब जब मोहब्बत का जमाने मे, मेरा नाम अपने लब पर लाकर बुदबुदाते हैं वो. मुझसे मिलने मे बदनामी का डर था जिनको, छोड़ कर हया मेरी कब्र पे दौडे चले आतें हैं वो. उनके गम का सबब कोई जो पूछे उनसे , दुनिया को मुझे अपना आशिक बतातें हैं वो, कहे जो उनसे कोई पहने शादी का जोडा वो, मेरी मिट्टी से मांग अपनी सजाते है वो. मेरी कब्र पे दो फूल रोज आकर चढाते हैं वो, हाय , इस कदर क्यों मुझे तडपते हैं वो

दृष्टि

Seema Gupta अनंतकाल से ये दृष्टि प्रतीक्षा पग पर अडिग , पलकों के आंचल से सर को ढांक , आतुरता की सीमा लाँघ अविरल अश्रुधारा मे डूबती , तरती , उभरती , व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती तुम्हारी इक आभा को प्यासी अनंतकाल से ये दृष्टि प्रतीक्षा पग पर अडिग

"एहसास"

SEEMA GUPTA हर साँस मे जर्रा जर्रा पलता है कुछ, यूँ लगे साथ मेरे चलता है कुछ. सोच की गागर से निकल शब्द बन अधरों पे खामोशी से मचलता है कुछ. ये एहसास क्या ... तुम्हारा है प्रिये ??? जो मोम बनके मुझमे , बर्फ़ मानिंद ... पिघलता है कुछ

"तेरी याद में"

SEEMA GUPTA तेरी ग़ज़लों को पढ़ रहा हूँ मैं , और तेरी याद में शिद्दत है बहुत जैसे तुझसे ही मिल रहा हूँ मैं, और तेरे प्यार में राहत है बहुत वो तेरे वस्ल का दिन याद आया, मुझ पे अल्लाह की रहमत है बहुत तुझसे मिलाने को तरसता हूँ मैं, मेरी जान तुझ से मुहब्बत है बहुत तेरे अंदाज़ में ख़ुद को देखा, हाँ तुझे मेरी ही चाहत है बहुत

किस्मत का उपहास

SEEMA GUPTA हर बीता पल इतीहास रहा, जीना तुझ बिन बनवास रहा ये चाँद सितारे चमके जब जब इनमे तेरा ही आभास रहा चंचल हुई जब जब अभिलाषा, तब प्रेम प्रीत का उल्लास रहा, तेरी खातिर कण कण पुजा पत्थरों में भगवन का वास रहा विरह के नगमे गूंजे कभी कभी सन्नाटो का साथ रहा गुजरे दिन आये याद बहुत "किस्मत" का कैसा उपहास रहा.

अश्कों का दिया

SEEMA GUPTA रात गमगीन रही दिल वीरान रहा कितना खामोश ये आसमान रहा सिसकियों की सरगोशियाँ उफ़ "अश्कों का दिया " अंधेरों मे मेहरबान रहा

खामोश सी रात

SEEMA GUPTA सांवली कुछ खामोश सी रात, सन्नाटे की चादर मे लिपटी, उनींदी आँखों मे कुछ साये लिए, ये कैसी शिरकत किए चली जाती है.... बिखरे पलों की सरगोशियाँ , तनहाई मे एक शोर की तरह, करवट करवट दर्द दिए चली जाती है.... कुछ अधूरे लफ्जों की किरचें, सूखे अधरों पे मचल कर, लहू को भी जैसे सर्द किए चली जाती है... सांवली कुछ खामोश सी रात अक्सर...