Friday, July 25, 2008

गज़ल

देवमणि पांडेय
नही और कोई कमी ज़िन्दगी में
चलो मिल के ढ़ूंढ़ें ख़ुशी ज़िन्दगी में

हज़ारों नहीं एक ख़्वाहिश है दिल में
मिले काश कोई कभी ज़िन्दगी में

अगर दिल किसी को बहुत चाहता है
उसे कर लो शामिल अभी ज़िन्दगी में

मोहब्बत की शाख़ों पे गुल तो खिलेंगे
अगर होगी थोड़ी नमी ज़िन्दगी में

निगाहों में ख़ुशबू क़दम बहके बहके
ये दिन भी हैं आते सभी ज़िन्दगी में

मिलेंगे बहुत चाहने वाले तुमको
मिलेगा न हमसा कभी ज़िन्दगी में

बिछड़कर किसी से न मर जाए कोई
वो मौसम न आए किसी ज़िन्दगी में

3 comments:

seema gupta said...

नही और कोई कमी ज़िन्दगी में
चलो मिल के ढ़ूंढ़ें ख़ुशी ज़िन्दगी में
"wonderful"

"rehne de aasman, zami ki talash kr, sab kuch yheen hai, kahi aur na tallash kr, har aarzu puri ho to jine ka kya mazza, jine ke liye bas ek kame ki talaash kr"

rajani said...

it's really wonderful

Rajeev Bharol said...

बेहद खूबसूरत गज़ल.