Sunday, July 20, 2008

कॉंलेज - मस्ती की पाठशाला

रजनी मैहता

कॉंलेज के बीते दिनों की याद आती है,
कैसे शाम दोस्तों के साथ घूमने में बीत जाती थी!

फोन पर देर रात तक लम्बी बात होती थी,
जीवन में खुशी की बरसात होती थी!

एस.एम.एस फ्रैन्ड़स को भेजते रहते थे,
अपनी हर बात अपने दोस्तों से कहते थे!

वैलेंटाईन ड़े पर कॉंलेज में होता बहुत हंगामा था,
लाल गुलाब कॉंलेज की हर लड़की के हाथ में नजर आना था!

जीवन को खुशियों से भरने का अच्छा बहाना था
जिसने बाद में हर किसी को रूलाना था!

फ्राइड़े को फिल्म देखने का बनता प्रोग्राम था
फैशन भी कॉंलेज में बदल जाता हर शाम था!

कॉंलेज मस्ती की पाठशाला है कहलाता,
जीवन का हर रंग कॉंलेज में देखने को मिल जाता!

पढ़ाई कम और मस्ती होती कॉंलेज में ज्यादा है,
मोबाईल का भी कॉंलेज में होने का एक फायदा है!

कॉंलेज में जाने का अपना ही मजा है,
अगर मस्ती के साथ पढ़ाई न हो तो जीवन बन जाता एक सजा है!

पढ़ाई के साथ-साथ पूरा लो कॉंलेज लाइफ का आनन्द,
जीवन में कभी न बनाओ बुरे दोस्तों का संग!

1 comment:

seema gupta said...

वैलेंटाईन ड़े पर कॉंलेज में होता बहुत हंगामा था,
लाल गुलाब कॉंलेज की हर लड़की के हाथ में नजर आना था!
" ha ha ha ha really wonderfull"