Wednesday, July 23, 2008

एक थी आरूषि

रजनी

मॉं-बाबुल के प्यार में पली एक नन्ही सी कली,
पर बड़ी होने से पहले गयी कुचली!

माता-पिता की रंजिश बेटी से निकाली,
खेलने की उम्र में उसकी हत्या कर ड़ाली!

फिर लगाया बेटी के कत्ल का इल्जाम पिता पर,
क्या गुजरी होगी जिसने खुद लिटाया बेटी को चिता की सेज पर!

आंसुओं की धारा बह निकली आंखों से मगर,
पर बेटी को न बचा पाने का अफसोस रहेगा जिन्दगी भर!

1 comment:

seema gupta said...

आंसुओं की धारा बह निकली आंखों से मगर,
पर बेटी को न बचा पाने का अफसोस रहेगा जिन्दगी भर!

"ah! what could be more painful than this??????"