Thursday, July 24, 2008

गज़ल

देवमणि पांडेय
दिल ने चाहा बहुत पर मिला कुछ नहीं
ज़िन्दगी हसरतों के सिवा कुछ नहीं

उसने रुसवा सरेआम मुझको किया
उसके बारे में मैंने कहा कुछ नहीं

इश्क़ ने हमको सौग़ात में क्या दिया
ज़ख़्म ऐसे कि जिनकी दवा कुछ नहीं

पढ़के देखीं किताबें मोहब्बत की सब
आँसुओं के अलावा लिखा कुछ नहीं

हर ख़ुशी मिल भी जाए तो क्या फ़ायदा
ग़म अगर न मिले तो मज़ा कुछ नहीं

ज़िन्दगी ये बता तुझसे कैसे मिलें
जीने वालों को तेरा पता कुछ नहीं

1 comment:

junaid said...

bht khoob..
zindagi ek fun hai lamhon ko
apne andaaz me ganwaane ka..