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दलित विमर्श और हम

पुस्तक प्रकाशित






दलित विमर्श और हम
स. फीरोज/शगुफ्ता



अनुक्रम


दो शब्द


शिव कुमार मिश्र - दलित साहित्यःअंतर्विरोध के बीच और उनके बावजूद ०९


माता प्रसाद - दलित साहित्य, सामाजिक समता का साहित्य है १८


शुकदेव सिंह - दलित-विमर्श, दलित-उत्कर्ष और दलित-संघर्ष २१


धर्मवीर - डॉ० शुकदेव सिंह : पालकी कहारों ने लूटी २९


रामदेव शुक्ल - कौन है दलितों का सगा? ३६


मूलचन्द सोनकर - रंगभूमि के आईने में सूरदास के नायकत्व की पड़ताल ४४


सुरेश पंडित - दलित साहित्य : सीमाएं और सम्भावनाएँ ६१


रामकली सराफ - दलित विमर्श से जुड़े कुछ मुद्दे ६७


कमल किशोर श्रमिक - अम्बेडकर की दलित चेतना एवं मार्क्स ७५


ईश कुमार गंगानिया- दलित आईने में मीडिया ८०


सूरजपाल चौहान - दलित साहित्य का महत्त्व एवं उसकी उपयोगिता ८७


अनिता भारती - दलिताएँ खुद लिखेंगी अपना इतिहास ९०


हरेराम पाठक - दलित लेखन : साहित्य में जातीय सम्प्रदायवाद का संक्रमण ९८


तारा परमार - दलित महिलाएं एवं उनका सशक्तिकरण १०४


तारिक असलम - दलित मुसलमानों की सामाजिक त्रासदी ११०


मानवेन्द्र पाठक - साठोत्तरी हिन्दी कविता में दलित-चेतना ११९


जगत सिंह बिष्ट - शैलेश मटियानी के कहानी साहित्य में दलित संदर्भ १२४


जसराम हरनोटिया-निजीकरण और दलित १३४


आदित्य प्रचण्डिया-दलित साहित्य-चिन्तन के दस्तावेज १४०


फीरोज खान - दलित साहित्य की अवधारणा एवं दलित साहित्यः एक विमर्श १४४


इकरार अहमद - दलित विरोध का यथार्थ १४९


साक्षात्कार


- डॉ० जय प्रकाश कर्दम से डॉ० पूरन सिंह की अन्तरंग बातचीत १५६


- तीन आम दलित व्यक्तियों से डॉ० मेराज अहमद की बातचीत १६१


- रमणिका गुप्ता से डॉ० शगुफ्ता नियाज की अन्तरंग बातचीत १७२


- डॉ० श्योराज सिंह बेचैन से मिर्जा गौहर हयात की बातचीत १८०


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साक्षात्कार जनसंचार का अनिवार्य अंग है। प्रत्येक जनसंचारकर्मी को समाचार से संबद्ध व्यक्तियों का साक्षात्कार लेना आना चाहिए, चाहे वह टेलीविजन-रेडियो का प्रतिनिधि हो, किसी पत्र-पत्रिका का संपादक, उपसंपादक, संवाददाता। साक्षात्कार लेना एक कला है। इस विधा को जनसंचारकर्मियों के अतिरिक्त साहित्यकारों ने भी अपनाया है। विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में, हर भाषा में साक्षात्कार लिए जाते हैं। पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी, दूरदर्शन, टेलीविजन के अन्य चैनलों में साक्षात्कार देखे जा सकते हैं। फोन, ई-मेल, इंटरनेट और फैक्स के माध्यम से विश्व के किसी भी स्थान से साक्षात्कार लिया जा सकता है। अंतरिक्ष में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष यात्री कैप्टन राकेश शर्मा से संवाद किया था, जिसे दूरदर्शन ने प्रसारित किया था। इस विधा का दिन पर दिन प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
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