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वाड्मय पत्रिका का लोकार्पण नासिरा शर्मा अंक


नासिरा शर्मा विशेषांक उपलब्ध मूल्य 100/ (डाक खचॅ अलग) पृष्ट 344
अनुक्रम

सम्पादकीय
नासिरा शर्मा : मेरे जीवन पर किसी का हस्ताक्षर नहीं
डॉ. सुदेश बत्रा : नासिरा शर्मा - जितना मैंने जाना
ललित मंडोरा अद्भुत जीवट की महिला नासिरा शर्मा
अशोक तिवारी : तनी हुई मुट्ठी में बेहतर दुनिया के सपने
शीबा असलम फहमी : नासिरा शर्मा के बहान
अर्चना बंसल : अतीत और भविष्य का दस्तावेज : कुइयाँजान
फजल इमाम : जीरो रोड में दुनिया की छवियां
अमरीक सिंह दीप : ईरान की खूनी क्रान्ति से सबक़
सुरेश पंडित : रास्ता इधर से भी जाता है
वेद प्रकाश : स्त्री-मुक्ति का समावेशी रूप
डॉ. नगमा जावेद : जिन्दा, जीते-जागते दर्द का एक दरिया हैः जिन्दा मुहावरे
डॉ. आदित्य : भारतीय संस्कृति का कथानक जीवंत अभिलेखः अक्षयवट
एम. हनीफ़ मदार : जल की व्यथा-कथा कुइयांजान के सन्दर्भ में
बन्धु कुशावर्ती : जीरो रोड का सिद्धार्थ
प्रो. अली अहमद फातमी - एक नई कर्बला
सगीर अशरफ : नासिरा शर्मा का कहानी संसार - एक दृष्टिकोण
प्रत्यक्षा सिंहा : संवेदनायें मील का पत्थर हैं
डॉ. ज्योति सिंह : इब्ने मरियम : इंसानी मोहब्बत का पैग़ाम देती कहानियाँ
डॉ. अवध बिहारी : इंसानियत के पक्ष में खड़ी इबारत - शामी काग़ज
डॉ. संजय श्रीवास्तव : मुल्क़ की असली तस्वीर यहाँ है
हसन जमाल : खुदा की वापसी : मुस्लिम-क़िरदारों की वापसी
प्रताप दीक्षित : बुतखाना : नासिरा शर्मा की पच्चीस वर्षों की कथायात्रा का पहला पड़ाव
प्रो. वीरेन्द्र मोहन : मानवीय संवेदना और साझा संस्कृति की दुनियाः इंसानी नस्ल
प्रो. रोहिताश्व : रोमांटिक अवसाद और शिल्प की जटिलता
मूलचंद सोकर : बुजकशी का मैदान- एक महान देश की अभिशप्त गाथा
प्रो. रामकली सराफ : स्त्रीवादी नकार के पीछे इंसानी स्वरः औरत के लिए औरत
इकरार अहमद : राष्ट्रीय एकता का यथार्थ : राष्ट्र और मुसलमान
सिद्धेश्वर सिंह : इस दुनिया के मकतलगाह में फूलों की बात
आलोक सिंह : नासिरा शर्मा का आलोचनात्मक प्रज्ञा-पराक्रम
डॉ. मेराज अहमद : नासिरा शर्मा का बाल साहित्य : परिचयात्मक फलक
नासिरा शर्मा प्रेमकुमार की बातचीत
नासिरा शर्मा मेराज अहमद और फीरोज अहमद की बातचीत


सम्पादक: वाङ्मय (त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका)

बी-4,लिबटी होम्स ,अलीगढ,

उत्तरप्रदेश(भारत),202002,

मोब: +91 941 227 7331

Comments

Abhishek Mishra said…
नासिर शर्मा जी के बारे में वांग्मय के पिछले अंक में जो जानकारी मिली थी उसने इन्हें लेकर उत्सुकता बढा दी थी, अब इस अंक का बेसब्री से इंतजार है.

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प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार का उद्देश्य और चरित्रमाध्यमोपयोगी साक्षात्कार से पूरी तरह भिन्न होता है। इसका आयोजन सरकारी या निजी प्रतिष्ठानों में नौकरी से पूर्व सेवायोजक के द्वारा उचित अभ्यर्थी के चयन हेतु किया जाता है; जबकि माध्यमोपयोगी साक्षात्कार, जनसंचार माध्यमों के द्वारा जनसामान्य तक पहुँचाये जाते हैं। जनमाध्यम की प्रकृति के आधार पर साक्षात्कार भ…