Friday, May 1, 2009

सुकर : दुष्कर

महेंद्रभटनागर

महज़
दिन बिताना सरल है,
जीना कठिन !
.
ज़िन्दगी को काटना
कितना सहज है,
खण्डित व्यक्तित्व के
धागों
रेशों को
सहेजना
सँवारना
सीना कठिन !
.
केवल
समय-असमय
उगलने को गरल है
पीना कठिन !
महज़
दिन बिताना सरल है
जीना कठिन !

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