Skip to main content

हिन्दी इन्टरव्यू : उद्भव और विकास


पुस्तक उपलब्ध

मूल्य 200(25प्रतिशत छूट के साथ)

आलेख
डॉ० मेराज अहमद- साक्षात्कार की भूमिका
प्रो० रमेश जैन- साक्षात्कार
डॉ० विष्णु पंकज- हिन्दी इन्टरव्यू : उद्भव और विकास
डॉ० हरेराम पाठक- हिन्दी साक्षात्कार विधा : स्वरूप एवं सम्भावनाएं
अशफ़ाक़ कादरी- साहित्य एवं मीडिया में साक्षात्कार - एक दृष्टि
विज्ञान भूषण- प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संबंधित साक्षात्कार की सैद्धान्तिकी में अन्तर
दिनेश श्रीनेत- हमारे समय में नचिकेता का साहस
साक्षात्कार
डॉ० शिवकुमार- मिश्र डॉ० सूर्यदीन यादव
प्रो० मैनेजर पाण्डेय -देवेन्द्र चौबे, अभिषेक रोशन, रेखा पाण्डेय एवं उदय कुमार
जाबिर हुसैन- रामधारी सिंह दिवाकर
नासिरा शर्मा- डॉ० फीरोज अहमद
काशीनाथ सिंह- रामकली सराफ
मधुरेश- साधना अग्रवाल
ओमप्रकाश वाल्मीकि- डॉ० शगुफ्ता नियाज
कंवल भारती- अंशुमाली रस्तोगी
डॉ० अर्जुनदास केसरी- डॉ० हरेराम पाठक
चित्रा मुद्गल- श्याम सुशील
मलखान सिंह सिसौदिया -डॉ० राजेश कुमार
शहरयार- डॉ० जुल्फिकार
प्रो० जमाल सिद्दीकी- डॉ० मेराज अहमद एवं डॉ० फीरोज अहमद
एक साधारण होटल वाला- डॉ० मेराज अहमद

Comments

Popular posts from this blog

हिन्दी साक्षात्कार विधा : स्वरूप एवं संभावनाएँ

डॉ. हरेराम पाठक हिन्दी की आधुनिक गद्य विधाओं में ‘साक्षात्कार' विधा अभी भी शैशवावस्था में ही है। इसकी समकालीन गद्य विधाएँ-संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, आत्मकथा, अपनी लेखन आदि साहित्येतिहास में पर्याप्त महत्त्व प्राप्त कर चुकी हैं, परन्तु इतिहास लेखकों द्वारा साक्षात्कार विधा को विशेष महत्त्व नहीं दिया जाना काफी आश्चर्यजनक है। आश्चर्यजनक इसलिए है कि साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा साक्षात्कार विधा ही एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा किसी साहित्यकार के जीवन दर्शन एवं उसके दृष्टिकोण तथा उसकी अभिरुचियों की गहन एवं तथ्यमूलक जानकारी न्यूनातिन्यून समय में की जा सकती है। ऐसी सशक्त गद्य विधा का विकास उसकी गुणवत्ता के अनुपात में सही दर पर न हो सकना आश्चर्यजनक नहीं तो क्या है। परिवर्तन संसृति का नियम है। गद्य की अन्य विधाओं के विकसित होने का पर्याप्त अवसर मिला पर एक सीमा तक ही साक्षात्कार विधा के साथ ऐसा नहीं हुआ। आरंभ में उसे विकसित होने का अवसर नहीं मिला परंतु कालान्तर में उसके विकास की बहुआयामी संभावनाएँ दृष्टिगोचर होने लगीं। साहित्य की अन्य विधाएँ साहित्य के शिल्पगत दायरे में सिमट कर रह गयी...

प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संबंधित साक्षात्कार की सैद्धान्तिकी में अंतर

विज्ञान भूषण अंग्रेजी शब्द ‘इन्टरव्यू' के शब्दार्थ के रूप में, साक्षात्कार शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसका सीधा आशय साक्षात्‌ कराना तथा साक्षात्‌ करना से होता है। इस तरह ये स्पष्ट है कि साक्षात्कार वह प्रक्रिया है जो व्यक्ति विशेष को साक्षात्‌ करा दे। गहरे अर्थों में साक्षात्‌ कराने का मतलब किसी अभीष्ट व्यक्ति के अन्तस्‌ का अवलोकन करना होता है। किसी भी क्षेत्र विशेष में चर्चित या विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व और कृतित्व की जानकारी जिस विधि के द्वारा प्राप्त की जाती है उसे ही साक्षात्कार कहते हैं। मौलिक रूप से साक्षात्कार दो तरह के होते हैं -१. प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार २. माध्यमोपयोगी साक्षात्कार प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार का उद्देश्य और चरित्रमाध्यमोपयोगी साक्षात्कार से पूरी तरह भिन्न होता है। इसका आयोजन सरकारी या निजी प्रतिष्ठानों में नौकरी से पूर्व सेवायोजक के द्वारा उचित अभ्यर्थी के चयन हेतु किया जाता है; जबकि माध्यमोपयोगी साक्षात्कार, जनसंचार माध्यमों के द्वारा जनसामान्य तक पहुँचाये जाते हैं। जनमाध्यम की प्रकृति के आधार पर साक्षात्कार...

नफ़ीस आफ़रीदी, साभार इंटरनेट