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डॉ. एम. फ़ीरोज़ खान



मूल आलोचनात्मक ग्रंथ
1. मुस्लिम विमर्श साहित्य साहित्य के आईने में
2. हिंदी के मुस्लिम कथाकार : एक अध्ययन
3. मुस्लिम उपन्यासकारों के साहित्य में चित्रित जीवन और समाज (शीघ्र प्रकाश्य)

सम्पादित पुस्तकें 
1. थर्ड जेण्डर पर केन्द्रित हिंदी का प्रथम उपन्यास : यमदीप
2. थर्ड जेण्डर : हिंदी कहानियां 
3. सिनेमा की निगाह में थर्ड जेण्डर
4. थर्ड जेण्डर और साहित्य
5. थर्ड जेण्डर और ज़िंदगी 50-50
6. हम भी इंसान हैं (कहानी-संग्रह, थर्ड जेण्डर पर)
7. हमख़्याल (कहानी-संग्रह)
8. थर्ड जेण्डर : वर्तमान और अतीत
9. थर्ड जेण्डर : अनुदित कहानियां
10. किन्नर कथा : तीसरी दुनिया का सच
11. दरमियाना : आधी हकीकत आधा फसाना
12.प्रवासी महिला कथाकार (प्रथम एवं चर्चित कहानियाँ)
13. साहित्य के आईने में आदिवासी विमर्श
14. आदिवासी विमर्श दशा एवं दिशा
15. आदिवासी साहित्य की हकीकत उपन्यासों के आईने में
16. नासिरा शर्मा : एक मूल्यांकन
17. कुइंयाजान : एक मूल्यांकन
18. जीरो रोड  : एक मूल्यांकन
19. नारी विमर्श : दशा एवं दिशा
20. दलित साहित्य और हम
21. हिंदी के मुस्लिम कथाकार
22. नई सदी में कबीर
23. हिंदी साक्षात्कार उद्भव और विकास
24.नये संदर्भों में दलित विमर्श
24. हिंदी के मुस्लिम कथाकार शानी
25. हिंदी उपन्यास के शिखर
26. हिंदी काव्य के विविध रंग
27. कथाकार कुसुम अंसल : एक मूल्यांकन
28. कथाकार अब्दुल बिस्मिलाह : मूल्यांकन के विकवध आयाम
29. आदिवासी चर्चित कहानियाँ
30. थर्ड जेण्डर : कथा आलोचना










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साक्षात्कार जनसंचार का अनिवार्य अंग है। प्रत्येक जनसंचारकर्मी को समाचार से संबद्ध व्यक्तियों का साक्षात्कार लेना आना चाहिए, चाहे वह टेलीविजन-रेडियो का प्रतिनिधि हो, किसी पत्र-पत्रिका का संपादक, उपसंपादक, संवाददाता। साक्षात्कार लेना एक कला है। इस विधा को जनसंचारकर्मियों के अतिरिक्त साहित्यकारों ने भी अपनाया है। विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में, हर भाषा में साक्षात्कार लिए जाते हैं। पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी, दूरदर्शन, टेलीविजन के अन्य चैनलों में साक्षात्कार देखे जा सकते हैं। फोन, ई-मेल, इंटरनेट और फैक्स के माध्यम से विश्व के किसी भी स्थान से साक्षात्कार लिया जा सकता है। अंतरिक्ष में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष यात्री कैप्टन राकेश शर्मा से संवाद किया था, जिसे दूरदर्शन ने प्रसारित किया था। इस विधा का दिन पर दिन प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
मनुष्य में दो प्रकार की प्रवृत्तियाँ होती हैं। एक तो यह कि वह दूसरों के विषय में सब कुछ जान लेना चाहता है और दूसरी यह कि वह अपने विषय में या अपने विचार दूसरों को बता देना चाहता है। अपने अनुभ…

हिन्दी साक्षात्कार विधा : स्वरूप एवं संभावनाएँ

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हिन्दी की आधुनिक गद्य विधाओं में ‘साक्षात्कार' विधा अभी भी शैशवावस्था में ही है। इसकी समकालीन गद्य विधाएँ-संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, आत्मकथा, अपनी लेखन आदि साहित्येतिहास में पर्याप्त महत्त्व प्राप्त कर चुकी हैं, परन्तु इतिहास लेखकों द्वारा साक्षात्कार विधा को विशेष महत्त्व नहीं दिया जाना काफी आश्चर्यजनक है। आश्चर्यजनक इसलिए है कि साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा साक्षात्कार विधा ही एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा किसी साहित्यकार के जीवन दर्शन एवं उसके दृष्टिकोण तथा उसकी अभिरुचियों की गहन एवं तथ्यमूलक जानकारी न्यूनातिन्यून समय में की जा सकती है। ऐसी सशक्त गद्य विधा का विकास उसकी गुणवत्ता के अनुपात में सही दर पर न हो सकना आश्चर्यजनक नहीं तो क्या है।
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