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थर्ड जेन्डर...

 थर्ड जेन्डर... प्रो. मेराज अहमद सामाजिक संरचना मुख्यतः द्विलिंगी होती है। मादा और नर। स्त्राी और पुरुष उसका प्रतिनिधित्व करते हैं। समाज में तीसरा लिंग भी रहता जो न तो नर ही होता है न मादा ही। अर्थात् अलिंगी होता है। इसे परिष्कृत शब्दावली में किन्नर कहा जाता है। इनके अलग-समाजों और भाषाओं में विविध नाम है। हिन्दी में इसके लिए शिखण्डी, छक्का, कीव, खोजा, मौसी और हिजड़ा इत्यादि अन्य नाम भी प्रचलित हैं। भारतीय इतिहास में पौराणिक काल से ही हिजड़ों का उल्लेख मिलता है। महाभारत मंे हिजड़े का उल्लेख शिखण्डी के रूप में मिलता है। महाभारत में भी शिखंडी नामक किन्नर योद्धा था जिसकी मदद से अर्जुन ने भीष्म पितामह का वध किया था। कहा जाता है कि अर्जुन ने भी अपने अज्ञातवास का एक वर्ष वृहन्नला नाम से किन्नर का रूप धारण करके बिताया था। राजा- महाराजा भी किन्नरों को अपनी रानियों की पहरेदारियों के लिये रखते थे क्यों राजाओं को अधिक से अधिक समय युद्ध के मोर्चे बिताना पड़ता था। इसके पीछे उनकी यह सोच थी कि रानिया पहरेदारों से अवैध संबंध न बना सके। मुस्लिम शासन में हरमों की सुरक्षा के लिए हिजड़े ख्वाजासरा के न...
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हाशिया के विमर्श में सशक्त उपस्थिति

-          डॉ रमाकान्त राय बीते दिनों हिंदी में एक बहस चली थी कि इस भाषा में लिखने वाले मुसलमान नहीं के बराबर हैं। इस बहस के बरक्स लोगों ने हिंदी के मुस्लिम साहित्यकारों की तलाश शुरू की और उनकी एक समृद्ध परम्परा की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया। यह दिखाने की कोशिशें भी हुईं कि यह एक विशेष किस्म की राजनीति की वजह से भी हो रहा है। वरना हिंदी में अमीर खुसरो, रहीम, रसखान से लगायत इंशा अल्लाह खान, गुलशेर खान शानी, राही मासूम रज़ा, बदीउज्जमाँ, अब्दुल बिस्मिल्लाह, असगर वजाहत, नासिरा शर्मा, अनवर सुहैल, मेराज अहमद तक एक अविछिन्न परम्परा चली आ रही है।  साहित्य की दुनिया में इन नामों की उपस्थिति को और मजबूती से जगह देने के अपने अभियान के तहत डॉ एम। फ़ीरोज़ खान अपनी पत्रिका वांग्मय के कई अंक विशेष तौर पर ऐसे ही मुस्लिम रचनाकारों को ध्यान में रखकर निकालते रहे हैं। उनके इस अभियान का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव ‘राही मासूम रज़ा और बदीउज्जमाँ मूल्यांकन के विविध आयाम’ नामक कृति भी है जो हिंदी के दो प्रख्यात रचनाकारों राही मासूम रज़ा और बदीउज्जमाँ की रचनाओं का विविध आलोचकों...
आप   सबसे   ज़्यादा   किस   किन्नर   से   प्रभावित   हुई   है   और   क्यों ? नहीं   मैं   किसी   भी   किन्नर   से   प्रभावित   नहीं   हूँ।   अगर   मैं   प्रभावित   हूँ   तो   अपनी   जिन्दगी   के   उतार   चढ़ावो   से ,  अगर   मैं   प्रभावित   हूँ   तो   मेरे   साथ   हुए   मेरे   ही   परिवार   या   मित्रा - प्यारों   के   व्यवहार   से ,  अगर   मैं   प्रभावित   हूँ   तो   अपने   द्वारा   किये   गये   मेरे   संघर्षों   से ,  अगर   मैं   प्रभावित   हूँ   तो   इस   बात   से   कि   मेरे   अपनों   जिन्हें   मैंने   जान   से   भी   ज्यादा   चाहा ,  उनके   द्वारा   मुझे   प्यार   देना   तो   द...