Sunday, January 24, 2010

डॉ० हरिवंश राय बच्चन की ७वीं पुण्यतिथि पर विचार-विमर्श

डॉ० हरिवंश राय बच्चन की ७वीं पुण्यतिथि पर हलीम मुस्लिम पी.जी. कालेज, कानपुर में एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें हिन्दी विभाग, उर्दू विभाग, शिक्षा संकाय वाणिज्य विभाग के प्रवक्ताओं ने अपने विचार प्रकट किये।


वाड्मय पत्रिका के सम्पादक एवं हिन्दी के प्रवक्ता डॉ० एम० फिरोज अहमद ने अपने वक्तव्य में कहा कि ''क्या भूलूं क्या याद करूं'' कविता-संग्रह ने हिन्दी साहित्य में हलचल मचा दी और यह हलचल मधुशाला से किसी भी प्रकार से कम नहीं थी। समकालीन अनेक लेखकों ने इसे हिन्दी के इतिहास की ऐसी पहली घटना बताया। जब अपने बारे में इतनी बेबाकी से सब कुछ कह देने के विकास और समूचे काल तथा क्षेत्र को भी उन्होंने अत्यंत जीवंत रूप से उभारकर प्रस्तुत किया। यह कृति आत्मकथा साहित्य की चरम परिणति है और इसकी गणना कालजयी रचनाओं में की जाती है।

हिन्दी विभाग के प्रभारी डॉ० ए० के० पाण्डेय ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा- ''सहजता और संवेदनशीलता उनकी कविता का एक विशेष गुण है। यह सहजता और सरल संवेदना कवि की अनुभूति मूलक सत्यता के कारण उपलब्ध हो सकी। बच्चन जी ने बड़े साहस, धैर्य और सच्चाई के साथ सीधी-सादी शैली में सहज कल्पनाशीलता और जीवंत बिम्बों से सजाकर, सवारकर अनूठे गीत हिन्दी को दिये।

शिक्षा संकाय के प्रवक्ता प्रो० हबीब इकराम ने अपने वक्तव्य में कहा - बच्चन जी बहुत लोकप्रिय हुए और मधुशाला ने तो धूम मचा दी। यह वास्तव में हिन्दी साहित्य की आत्मकथा का ही अंग बन गई और कालजयी रचनाओं की श्रेणी में आ खड़ी हुई है।

वाणिज्य विभाग के प्रवक्ता डॉ० तनवीर अख्तर ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा- ''बच्चन जी की सबसे बड़ी देन है कि उन्होंने कविता को आम जनता तक पहुंचाया और श्रोता-पाठक तैयार करने का काम किया। इसी विभाग के डॉ० अब्दुल्लाह फैज ने कहा कि उनकी पुस्तक ''मधुकलश'' की उपेक्षा हुई। आजादी की लड़ाई का दौर था उसमें साहस और हिम्मत दिलाने वाली महत्वपूर्ण कविताएं है।

उर्दू विभाग के प्रवक्ता डॉ० मेराज राना ने अपने वक्तव्य में कहा-बच्चन की ''मधुशाला'' बहुत प्रसिद्ध और लोकप्रिय हुई लेकिन बहुत जगह इसका विरोध भी हुआ। बच्चन जी का सबसे बड़ा योगदान हिन्दी कविता में यह है कि उनसे पहले कविता आकाश में घूम रही थी उसको उतारकर जमीन पर खड़ा कर दिया और सामान्य आदमी जैसा सुख-दुख भोग रहा है, उस सुख-दुख की कहानी उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से कही।

इस पुण्यतिथि के अवसर पर प्राचार्य डॉ० शकील अहमद ने बच्चन जी की कविताओं की विशिष्टता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो० अमान उल्ला खां ने उनकी शख्सियत पर अपने विचार व्यक्त किये।

इस अवसर पर प्रो० तुफैल सिद्दीकी, प्रो० शाहिद जफर, डॉ० मो० वाहिद, हफीज अहमद, डॉ० अफगान अहमद, प्रो० रेशमा हफीज, प्रो० मो० आरिफ, डॉ० शुक्ला एवं छात्र/छात्राओं ने भी विचार व्यक्त किये।









1 comment:

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

फ़िरोज़ साहब, आदाब
डा. हरिवंश राय बच्चन जैसी प्रतिभाएं युग युग तक याद रखी जायेंगी
इस प्रस्तुति के लिये मुबारकबाद
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद