दम्भ
काहे को दम्भ
जाये कुछ ना संग,
अच्छे हों ढंग।
थोड़ा
थोड़ा ही थोड़ा
धन अपार जोड़ा,
बना ही रोड़ा।
थैला
सँभाले थैला,
मन ना करें मैला,
यश ही फैला।
कंजूस
बना कंजूस,
लेता ही रहा घूस,
बना भी हूस।
दमड़ी
बनी दमड़ी,
उतार ले चमड़ी
बात बिगड़ी।
काहे को दम्भ
जाये कुछ ना संग,
अच्छे हों ढंग।
थोड़ा
थोड़ा ही थोड़ा
धन अपार जोड़ा,
बना ही रोड़ा।
थैला
सँभाले थैला,
मन ना करें मैला,
यश ही फैला।
कंजूस
बना कंजूस,
लेता ही रहा घूस,
बना भी हूस।
दमड़ी
बनी दमड़ी,
उतार ले चमड़ी
बात बिगड़ी।
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