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गम- ए-जिन्दगी

सीमा गुप्ता

गम-ए-जिन्दगी है पर गुज़रती है बडे आराम से ,
नहीं है अब कोई शिकवा दिल -ए -नाकाम से...

कारवां -ए -उम्मीद ने सर यूँ झुका लिए,
कोई लुभा सके न तमन्ना -ए - जाम से....

राहों पे धडकनों की पडी मौत की जंजीर ,
गुज़रे कोई जो बा-परवाह निगाह -ए- एहतराम से.....

जख्मी हुआ था दिल जो दगा - ओ -फरेब मे,
कहके क्यूँ लगा रहा है वफा -ए - अंजाम से

Comments

rajani said…
bahut achcha likha hai aapne
zindgi ko achchi tarah se samjha ja sakta hai aapki gajal padf kr.
गम-ऐ-जिन्दगी है पर गुज़रती है बडे आराम से ,
नही है अब कोई शिकवा दिल -ऐ -नाकाम से...

बहुत छु लेने वाली ग़ज़ल है ,अच्छा लिखा है दिल से लिखा है,ज़िन्दगी है तो गम भी है गम है तो ज़िन्दगी है

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