सीमा गुप्ता
जिन्दगी की धुप ने झुलसा दिया
एक शीतल छावं की तलाश है
रंज उल्फ़त नफरत से निबाह किया
एक दर्द-मंद दिल की तलाश है
रास्तों मे मंजिलें भटक गईं ,
एक ठहरे गावं की तलाश है
जिन्दगी की धुप ने झुलसा दिया
एक शीतल छावं की तलाश है
रंज उल्फ़त नफरत से निबाह किया
एक दर्द-मंद दिल की तलाश है
रास्तों मे मंजिलें भटक गईं ,
एक ठहरे गावं की तलाश है
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रहा उम्र भर मै जिसकी तलाश में,
मरते दम पता चला,
वो रहते थे दिल के पास में