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तलाश

सीमा गुप्ता

जिन्दगी की धुप ने झुलसा दिया
एक शीतल छावं की तलाश है
रंज उल्फ़त नफरत से निबाह किया
एक दर्द-मंद दिल की तलाश है
रास्तों मे मंजिलें भटक गईं ,
एक ठहरे गावं की तलाश है

Comments

बहुत अच्छी रचना है हर आदमी को तलाश है अपने वजूद की ....
रहा उम्र भर मै जिसकी तलाश में,
मरते दम पता चला,
वो रहते थे दिल के पास में