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गज़ल

अतुल अजनबी (ग्वालियर)
याद मेरा ये मशविरा रखना
अपने घर को न यूं खुला रखना
कोई सीखे ये आप से साहब
खुद को खुद से जुदा-जुदा रखना
रात के बाद दिन भी होता है
लाख दुख आएं, हौसला रखना
मैं भी रहता हूं दूर-दूर बहुत
तुम भी कुछ उससे फासला रखना
जो परिन्दा खुले में उड़ता हो
उस के ऊपर निगाह क्या रखना
जंग में जा रहे हो, जाओ मगर
वापसी का भी रास्ता रखना
'अजनबी' क्यों है इतनी मायूसी
किसलिए दिल बुझा-बुझा रखना

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