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चंगु-मंगु इन बॉम्बे

-राजेन्द्र राज

फिल्में देख-देख कर चंगु
खुद को स्टार समझने लगा
आईने के आगे खड़े होकर
अपनी सूरत से प्यार करने लगा

छितराए बाल, पिचके हुए गाल
सिमटी हुई छाती, फैली हुई चाल
झुक-झुकके है कि चलता है
लहराके निकलता है

रंगमंच की लघु-तारिकाएँ
इस पर जान छिड़कती हैं
ये ऐश्वर्या पर मरता है
सल्लू से मगर डरता है

चंगु को मिल गया मंगु
दोनों फिल्मों के दीवाने
मंगु के पास थे आठ सौ
चंगु के पास आठ आने

चंगु ने कहा मंगु से
चल मुम्बई चलते हैं
जूहू-बीच पर खड़े होकर
फिल्म की शूटिंग करते हैं

एक रोज़ दोनों भागकर
घर से मुम्बई आ गए
नीना गुप्ता की कमजोर कड़ी को
एक नज़र में भा गए
बोली नमस्ते ! आप आ सकते हैं
मेरी सूनी सेज सजा सकते हैं
बूढ़ी घोड़ी को हिनहिनाते देख
चंगु-मंगु सकपका गए

वहाँ से भागकर दोनों
सुभाष घई के दफ़्तर आ गए
मैनेजर ने कहा, आइए आपके आने से
फिल्मों के भाग्य जाग गए

सेल्यूलॉइड की दुनिया से
दोनों का परिचय कराया
चंगु को स्पॉट-ब्वॉय
मंगु को मेकअप मैन बनाया

झूठी दुनिया नकली लोग
दोनों को होश आ गए
बोले अपने शहर में जिएँगे
दिन में सिनेमा देखेंगे, रात में पिएँगे

चंगु-मंगु ट्रेन में बैठकर
वापस जयपुर आ गए
सत्तर एम.एम. के परदे पर
टाइटल बनकर छा गए।

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