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वो लड़कियां

विमला भंडारी

लड़कियां जायेगी अब स्कूल
किन्तु
वो लड़कियां
जिन्हें जाना चाहिए था ÷स्कूल'
आज भी
हांकती है
उसी तरह
ढ़ोर डंगर
काटती है
जंगलों में लकड़ियां
बीनती है सूखे कण्डे
और
टोपले में भर
ईंधन का बोझा
ढ़ोती है हर रोज
वो लड़कियां
ताकि
सिक सके घर परिवार की
÷रोटियां'


वो लड़कियां
जिन्हें जाना चाहिये था स्कूल
प्रतिदिन
चमकाती है
बर्तनों को
भरती है पानी
करती है
झाडू पौंछा
पौंछती है
भाईयों की बहती नाक
और/फोड़ती है पत्थरों को
मजूरी देती रहे उन्हें
रोटियां

वो लड़कियां
जिन्हें जाना चाहिये था स्कूल
प्रतिवर्ष
आखा तीज पर
गणगौर सी
सजाकर
युवा होने से पूर्व ही
ब्याह दी जाती है
किशोरी कोख से
किल्लोलती
जनमती है/फिर
वो लड़कियां
जिन्हें जाना चाहिये था स्कूल
किन्तु कभी नहीं
जा पायेगी वो स्कूल

Comments

Udan Tashtari said…
वो भी जायेंगी स्कूल एक दिन.

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